सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। 1983 के बाद पहली बार सोने ने इतना कमजोर प्रदर्शन किया है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सोने की कीमत में करीब 2.1% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण सोने पर दबाव बढ़ा। मजबूत डॉलर की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग कम हो जाती है और कीमतें गिरने लगती हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका द्वारा युद्धपोत और सैनिक भेजने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। आमतौर पर ऐसे समय में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों के कारण निवेशकों का रुख बदल गया है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल सोने के लिए सबसे बड़ा नेगेटिव फैक्टर बनकर उभरा है। जब निवेशकों को बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो वे सोने से दूरी बनाने लगते हैं। यही वजह है कि सोने की चमक फीकी पड़ रही है।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी सोने की कीमतों में लंबे समय तक गिरावट देखी गई थी। उस समय करीब 8 महीने तक सोना दबाव में रहा था। मौजूदा हालात भी कुछ वैसे ही नजर आ रहे हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद इस साल सोने की कीमतें करीब 5% ऊपर हैं। साल की शुरुआत में सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन अब बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में सोने में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। महंगाई बढ़ने के डर से केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे सोने पर और दबाव आ सकता है। इस समय निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। बाजार की स्थिति को देखते हुए लंबी अवधि की रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा।